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बना रहे बनारस / Bana Rahe Banaras Vishvanath Mukherji

बना रहे बनारस / Bana Rahe Banaras

Vishvanath Mukherji

Published
ISBN : 9788126316700
Hardcover
152 pages
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 About the Book 

A book of essays, based on Indian city of Banaras (Varanasi).तीन लोक से नयारी और मिथकीय विशवास के अनुसार तरिपुरारि के तरिशूल पर बसी काशी नगरी का नाम चाहे जिस कारण से बनारस पडा हो, किनतु इतना सुनिशचित है कि यहाँ का जीवन-रस अदवितीय है। काल और कालातीतMoreA book of essays, based on Indian city of Banaras (Varanasi).तीन लोक से न्यारी और मिथकीय विश्वास के अनुसार त्रिपुरारि के त्रिशूल पर बसी काशी नगरी का नाम चाहे जिस कारण से बनारस पड़ा हो, किन्तु इतना सुनिश्चित है कि यहाँ का जीवन-रस अद्वितीय है। काल और कालातीत के साक्षी बनारस के जीवन सर्वस्य को विश्वनाथ मुखर्जी ने बना रहे बनारस में जीवन्त सर्वस्य किया है। बनारस के विषय में कही-सुनी जानेवाली उक्तियों में एक यह भी है, विश्वनाथ गंगा बटी, गान खान और पान / संन्यासी सीढ़ी वृषभ काशी की पहचान। इस पहचान को लेखक ने कुछ ऐसे शब्दबद्ध किया है कि बतरस में बनारस का आस्वाद उतर आया है। एक बूँद सहसा उछली में यशस्वी साहित्यकार अज्ञेय ने ठीक ही लिखा है-हर एक बतर का अपना एक स्वाद होता है।बना रहे बनारस एक नगर को केन्द्र बनाकर लिखा गया संस्कृति-विमर्श है। भारतीय ज्ञानपीठ से इस पुस्तक का प्रथम संस्करण 1958 में प्रकाशित हुआ था। तत्कालीन बनारस और वर्तमान बनारस के बीच जाने कितना जल गंगा में प्रवाहित हो गया, किन्तु तत्त्वत: बनारस वही है जिसका अवलोकन लेखक विश्वनाथ मुखर्जी ने किया था। प्रस्तुत है अत्यन्त पठनीय व प्रभावी पुस्तक का यह नये कलेवर में नयी साज-सज्जा के साथ पुनर्नवा संस्करण।